Thursday, 17th October, 2019
Amazon
HEADAING
X

Breaking News

Oct-08-19 वायुसेना दिवस : हिंडन एयरबेस पर एयर शो का हुआ आगाज, वायुसेना अध्यक्ष ने ली परेड की सलामी

Divay Bharat / होम /28-Mar-2019/Viewed : 86

पितृभक्ति एवं मानवता के उत्कृष्ट उदाहरण हैं डुमराँव के डॉ शैलेश

वायुसेना दिवस : हिंडन एयरबेस पर एयर शो का हुआ आगाज, वायुसेना अध्यक्ष ने ली परेड की सलामी

दिव्यभारत डुमराँव डेस्क : चिकीत्सक को सदैव समाज नें ईश्वर के रूप में मान्यता दी है। धरती के भगवान जैसे विशेषणों से उन्हें पूर्वकाल से ही अभिहित किया जाता रहा है। दया, करुणा, कर्तव्यनिष्ठा, सेवा जैसे शब्दों की रचना भी संभवतः इन्हीं जैसे महानुभावों के कार्यों को देखते हुए की गई होगी। आज हम ऐसे ही मानवीय गुणों से अक्षादित एक चिकीत्सक से आपको रूबरू कराते हैं नाम है डॉ शैलेश श्रीवास्तव। ये मूल रूप से बक्सर जिले के एक प्रसिद्द एवं डुमराँव राज की पूर्व राजधानी का गौरव प्राप्त गाँव मठिला के रहने वाले हैं। इनके पिता स्व डॉ अनिल कुमार का नाम क्षेत्र में एक माननीय चिकीत्सक के रूप में अत्यंत श्रद्धा से आज भी ली जाती है। मसीहाई भावनानाओं से ओत-प्रोत डॉ अनिल कुमार डुमराँव नगर के राज अस्पताल में अपनी सेवा प्रदान करते रहे थे। वे न केवल बेहतर चिकित्सक के तौर पर जाने जाते थे बल्कि उन्हें क्षेत्र के असहाय एवं बेबस रोगियों को निःशुल्क चिकित्सा व्यस्था देने का यश प्राप्त था। उन्ही के पुनीत उद्देश्यों के कारवां को आगे बढ़ाते हुए उनके द्वितीय सुपुत्र डॉ शैलेश श्रीवास्तव आज जिला में अपने कर्तव्यनिष्ठा एव परोपकारिता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं।

  क्या है डॉ शैलेश का प्रेरणादायक जीवन परिचय ?    

    डॉ शैलेश क जन्म बक्सर जिला अन्तर्गत डुमराँव शहर में हुआ था। इनकी प्रारंभिक शिक्षा डुमराँव नगर अवस्थित नेशनल अकादमी से हुई। इन्होंने अपनी 7वीं की पढाई नगर के ही विद्यालय महाबीर चबूतरा से की वहीँ कक्षा आठ से कक्षा दस तक की पढाई डुमराँव राज ऊँच विद्यालय से संपन्न की। अपनी आगे की पढाई को गति देने के लिए इन्हें डुमराँव छोड़ना पड़ा और उनका इन्टरमिडीयेट में नामांकन बाढ़ के एक प्रतिष्ठित विद्यालय में करा दिया गया। वहां से इन्होंने बेहतरीन अंको के साथ इन्टर की परीक्षा पास की। इनको जानने वाले बताते हैं कि डॉ शैलेश बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के स्वामी थे. विद्यालय तथा कॉलेज में इनकी गिनती मेधावी छात्र के रूप में की जाती थी। इनके पिता जी की हार्दिक इच्छा थी कि वे इन्हें भी चिकीत्सक के रूप में देखें ताकि जनसेवा का कार्य अनवरत चलता रहे। पिता की भावना का भरपूर सम्मान देते हुए इन्होने मेडिकल की तैयारी पुरे जी-जान से प्रारम्भ की जिसके फलस्वरूप इन्होंने परीक्षा अच्छे नम्बरों से उत्तीर्ण की। M.B.B.S. की डिग्री लेने के पश्चात इन्होंने मैहर में बिरला गोल्ड सीमेंट के मेडिकल ऑफिसर के रूप में अपनी सेवाएं दी साथ ही M.D. की डिग्री प्राप्त करने हेतु नामांकन भी लिया। यह वाकया वर्ष 2013 का था। यह वर्ष एकतरफ जहाँ इनके लिए सफलता के मार्ग में पदार्पण करने का था वहीं दुःख एवं आत्मिक वेदना से जूझने का भी था। इसी वर्ष इनके पिता श्री का स्वर्गारोहण हो गया। पितृछाया से ये सदा के लिए वंचित हो गए। लेकिन पिता जी के सपनों को आकार देने में इन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ भूमिका का निर्वहन किया और M.D. की उपाधि सफलता पूर्वक प्राप्त किया। इस उपाधि को प्राप्त करने के पश्चात रांची के प्रतिष्ठित अस्पताल बी.एम.मेडिका सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में इन्होंने बतौर मेडिकल ऑफिसर कार्यभार ग्रहण किया। परन्तु अच्छी नौकरी और वेतन भी डुमराँव से इनका मोहभंग कराने में असफल रही। डुमराँव में बिताया अपना बचपन और पिताजी की यादें इनके स्मृतिपटल पर सदैव उभरती रहती थीं। जब भी गाँव आते जनमानस उनके यशस्वी पिता के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का वर्णन करते नहीं थकते। उन्हें डॉ शैलेश में इनके पिता स्व डॉ अनिल कुमार की छाया दृष्टिगोचर होती प्रतीत होती थी। अंततोगत्वा इनके डॉ बनने के पीछे पिता के पुनीत उद्देश्यों एवं साथ ही इनके ह्रदय में अंकित डुमराँव के प्रति अन्यतम प्रेम के समक्ष घुटने टेकना पड़ा और रांची के प्रतिष्ठित अस्पताल एवं अच्छी तनख्वाह को छोड़ 2017 में डुमरांव चले आये। इन्होंने यहाँ पिताजी के पूर्व सहयोगियों को साथ लेकर एक अस्पताल की स्थापना की। आज स्थापना के मात्र 2 वर्ष पुरे हुए हैं लेकिन अपने कार्यकुशलता, मृदुभाषिता,सद्व्यवहार एवं जनमानस में इनके पिताजी के प्रति अटूट श्रद्धा के बदौलत इन्होने स्वयं को बक्सर जिला के सर्वश्रेष्ठ चिकित्सकों में स्थापित कर लिया है।

क्या थी इनके पिताजी की हार्दिक इच्छा ?

इनके पिताजी की उत्कट अभिलाषा थी कि वे अपने गाँव मठिला में एक निःशुल्क अस्पताल का निर्माण कराएँ ताकि गांव के गरीबों एव लाचारों को अनवरत चिकित्सा सुविधा मिलती रहे लेकिन दैवीय इच्छा के समक्ष उनकी निज इच्छा उनके अपने जीवन काल में पूरी न हो सकी। परन्तु डॉ शैलेश ने अपने पिताजी के संजोये सपनों को साकार कर दिखाया। उन्होंने मसीहाई भावना से लबरेज पिता द्वारा अर्जित पुण्यकोष को द्रूतगति देते हुए गरीबों एव असहायों के लिए प्रत्येक शनिवार को अपने पैतृक गाँव मठिला में निःशुल्क चिकित्सा व्यवस्था देने का पुनीत कार्य प्रारम्भ किया है। इस पुण्यकर्म के संयोजक को यदि आज के श्रवण कुमार जैसे संज्ञा  से अभिहित किया जाये तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। आज ऐसे चिकित्सक जो निज स्वार्थ को प्रथम वरीयता देने लगे हैं उनको उनके वास्तविक कर्तव्यबोध कराने हेतु डॉ शैलेश निःसंदेह एक उत्कृष्ट स्रोत हैं। 

दिव्य भारत मीडिया उनके उज्जवल भविष्य की कामना करती है।

HEADAING
Apecial Offer
श्री राम कलेक्शन ड
Puja Special