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Divay Bharat / साहित्य एवं संस्कृति /10-Jun-2019/Viewed : 367

सनातन प्रकृत प्रेम : आयोजित हुई आम के पेड़ की शादी

जानिए विक्रम को खोजने में नासा की मदद करने वाला भारतीय इंजीनियर के बारें में

दिव्यभारत मीडिया, बक्सर डेस्क : आपने इंसानों की शादी के बारे में तो सुना ही होगा, जानवरों की शादी के बारे में भी कभी-कभी सुनने को मिल ही जाता है. लेकिन क्‍या आपने पेड़ों की शादी के बारे में सुना है. नहीं, तो अब सुनिए. बक्सर जिले के प्रमानपुर गाँव में आम के पेड़ की शादी कराई गई है.अलग तरह ही नजारा देखने को मिला.

इलाके में आम के पेड़ पर पहली फसल आने पर आम की शादी कराई गई और धूमधाम से बारात भी निकाली गई. अनोखी परंपरा के तहत आम की शादी में विवाह से जुड़ी सारी रस्मों को निभाते हुए पेड़ में लगे फल से ही शादी कराई गई. आम शादियों की तरह ही इस अनोखी शादी में बाराती और घराती दोनों पक्षों को शामिल किया गया.

इतना ही नहीं, इस शादी में पंडित को भी बुलाया गया. इस शादी में आमंत्रित लोग उपहारों के साथ पहुंचे. हर शादी की तरह यहां भी गाना-बजाना हुआ. शादी कर सभी रस्‍मों के बाद मेहमानों के भोज का भी इंतजाम किया गया.

विपुल पाण्डेय, पुत्र विनोद पाण्डेय ने तीन साल पहले अपने मामा गाँव प्रमानपुर में आम का पेड़ लगाया था. इस वर्ष उसके घर में लगे आम के पेड़ों में फल आने पर उन्‍होंने पेड़ में लगे फलों की शादी करने की सोची और बकायदा अपने रिश्‍तेदारों और ग्रामीणों सहित कुल 300 लोगों इस अनोखी शादी में शामिल होने का न्यौता दिया.

विनोद पाण्डेय जी का मानना है कि हिंदू संस्कृति में ऐसी मान्यता है कि पेड़ के पहले फल को वे तभी ग्रहण कर सकते हैं, जब उसका विवाह हो. अब यह प्रचलन बंद हो गया है. इस मान्यता के पीछे प्रकृति प्रेम का ही संदेश है कि हम उस पौधे को लगाते है उसकी सुरक्षा करते हैं देखभाल करते हुए बड़ी मेहनत के बाद यह पेड़ तैयार होता है और बारी आती है मीठे फलों की पेड़ हमें फल फूल और आक्सीजन वर्षो तक देते हैं.जिसे आज के युग में बड़ी बेदर्दी से काट दिया जाता है.

जिसके कारण पर्यावरण को खासा नुकसान पंहुच रहा है. ग्लोबल वार्मिंग, अतिवृष्टि, अल्पवृष्टि एवं सूखा जैसे मौसम से लोगों को दो चार होना पड़ रहा है. ये पेड़ हमारे जीवन के लिए अति आवश्यक है. हरियाली के साथ-साथ शुद्ध वायु तो देते ही हैं फल आने पर हमें अपने स्वाद के साथ साथ आर्थिक विकास में सहयोग देते हैं. एक बार पेड़ लगा ले और उसकी सुरक्षा कर ले तो 60 से 70 वर्ष तक उसका फसल लिया जा सकता है. ग्रामीणों ने बताया कि इस क्षेत्र में  लोगों को अपने खेतों पर फलदार पेड़ लगाने के लिए इस क्षेत्र के लोगों को प्रेरणा भी देता है.

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