Thursday, 17th October, 2019
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Oct-08-19 वायुसेना दिवस : हिंडन एयरबेस पर एयर शो का हुआ आगाज, वायुसेना अध्यक्ष ने ली परेड की सलामी

Divay Bharat / राष्ट्रीय /10-Aug-2019/Viewed : 114

नही थम रही लड़ाकू विमानों की दुर्घटनाएं,गुरुवार की रात भी एक सुखोई दुर्घटनाग्रस्त

वायुसेना दिवस : हिंडन एयरबेस पर एयर शो का हुआ आगाज, वायुसेना अध्यक्ष ने ली परेड की सलामी

दिव्य भारत मीडिया, नई दिल्ली डेस्क : देश में एयर फोर्स के फाइटर एयरक्राफ्ट के गिरने का एक सिलसिला सा बन गया है. पिछले साल जून महीने में ही दो जगुआर और सुखोई विमान गिर गए थे. जुलाई 2018 में भी एयर फोर्स का उड़ता ताबूत कहा जाने वाला मिग-21 विमान हिमाचल प्रदेश में गिर गया.

जून और जुलाई के 2 महीने में 3 फाइटर एयरक्राफ्ट के गिर जाने वाली घटनाओं की ये तो एक बानगी भर है. अगर हम सुखोई और मिग के क्रेश होने वाली घटनाओं की फेहरिस्त पर नज़र डालें तो आंकड़ा बेहद चौंकाने वाला है. लोकसभा ने पिछले साढ़े तीन साल में एयर फोर्स के दुर्घटना का शिकार हुए एयरक्राफ्ट की एक सूची भी जारी हुई थी.

फ्लाइंग कॉफिन के नाम से बदनाम है मिग सूची में हजारों करोड़ रुपए के विमानों के गिरने का आंकड़ा भी दिया गया है. लेकिन विमानों के साथ शहीद होने वाले 43 एयर फोर्स के अधिकारियों और जवानों का आंकड़ा बेहद चौंकाता है. हिमाचल के कांगड़ा में गिरे मिग-21 को फ्लाइंग कॉफिन ऐसे ही नहीं कहा जाता है.
सूत्रों की मानें तो देश में पिछले 45 साल में 465 मिग विमान ज़मीन पर गिर चुके हैं. वो भी दुश्मन से बिना लड़े हुए. अगर जंग के मैदान की बात करें तो क्रैश होने वाले मिग की संख्या 11 है. सूत्रों के अनुसार एक आंकड़े के मुताबिक 946 मिग विमानों में से 2 तो 1965 की लड़ाई में, 8 विमान 1971 की लड़ाई में और 1 मिग विमान 1999 में कारगिल की लड़ाई में क्रैश हो चुके हैं.
एयर फोर्स के 9 सुखाई विमान भी क्रेश हो चुके हैं. हेलिकॉप्टर की बात करें तो चेतक और एमआई-17 सरीखे हेलिकॉप्टर क्रेश हो चुके है. एक एमआई-17 हेलिकॉप्टर तो हाल ही में अरुणाचल प्रदेश में क्रेश हुआ था. मार्च 2017 में राजस्थान में एक हेलिकॉप्टर गिरा था.

हाल की घटनाओं में वायुसेना का लड़ाकू विमान सुखोई एसयू-30 असम में तेजपुर के पास धान के खेत में 9 अगस्त 2019 दिन गुरुवार रात क्रैश हाे गया। इस हादसे में दोनों पायलट बाल-बाल बच गए. रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल हर्षवर्धन पांडे ने कहा कि दोनों पायलट समय रहते बाहर निकल गए। एक काे पांव में चाेट आई है। यह लड़ाकू विमान रूटीन ट्रेनिंग मिशन पर था. खेत में क्रैश हाेते ही उसमें आग लग गई। स्थानीय लाेग पायलटाें काे अस्पताल ले गए। हादसे में सार्वजनिक संपत्ति काे किसी तरह का नुकसान नहीं हुआहै। इसकी काेर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश दे दिए गए हैं।

आज भी पुराने विमान उड़ा रहे हैं भारतीय पायलट

बचे हुए मिग में से कुछ को सरकार हटाने की बात कह रही है. वहीं 138 मिग-21 अपग्रेड करने के बाद 2022 तक उड़ाए जाएंगे. मिग की जगह सरकार एचएएल निर्मित तेजस को लाने की तैयारी कर रही थी. लेकिन हाल में तेजस भी विवादों में आ गया है.
वहीं इस बारे में रिटायर्ड एयर वाइस मार्शल कपिल कॉक कहते हैं कि एयर फोर्स में पायलट कि ट्रेनिंग एकदम युद्ध के हालातों जैसी ही होती है. इसलिए विमानों का गिरना कोई चौंकाने वाली बात नहीं है. पहले ये संख्या ज्यादा और अब बहुत कम हो चुकी है. दूसरी अहम बात ये कि सरकारी नितियों ने एयर फोर्स को आधुनिकीकरण से दूर रखा हुआ है. ये ही वजह है कि हमारे लड़के पुराने हो चुके विमानों को ही उड़ा रहे हैं.

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