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Divay Bharat / बड़ी ख़बर /12-Aug-2019/Viewed : 160

व्यवस्था की बीमारी से जूझ रहा बक्सर का आयुर्वेद कॉलेज

जानिए विक्रम को खोजने में नासा की मदद करने वाला भारतीय इंजीनियर के बारें में

दिव्य भारत मीडिया, बक्सर डेस्क :  शाहाबाद का इकलौता आयुर्वेद कॉलेज बक्सर के अहिरौली में है, जो अपनी अंतिम सांसे गिन रहा है। अहिरौली बांध पर राजकीय श्री धनवंतरि महाविद्यालय खंडहर में तब्दील हो गया है। यह एक ऐसा कॉलेज है जहां बच्चों की पढ़ाई नहीं होती है। इस कॉलेज में वर्ष 2003 से ही नामांकन बंद है। अब ना तो यहां कोई क्लास रुम बचा है और न हीं पढ़ाने के लिए लेक्चरर ही हैं। जानकारी के अनुसार यहां पंद्रह लेक्चरर का पद है। फिलहाल यहां तीन लेक्चरर हैं, जिसमें एक प्राचार्य के प्रभार में हैं।

सरकारीकरण होने के बाद बदहाल हुआ कॉलेज: इस कॉलेज की स्थापना 1972 में हुई थी। इसका सरकारीकरण वर्ष 9 दिसंबर 1987 में हुआ। इससे पहले इस कॉलेज का प्रबंधन प्राइवेट लोगों के हाथों में था। तब इस कॉलेज की स्थिति काफी बेहतर थी। क्लास रुम, प्रयोगशाला समेत अन्य सुविधाएं थी। जब से सरकारी हुआ तब से ही इसकी दशा बिगड़ने लगी। आज जो हाल है वह मत कहिए, जो लोग पहले इस कॉलेज को देखे हैं वह बताते हैं कि अब बोर्ड से महाविद्यालय को मिटा देना चाहिए।

कभी छात्र-छात्राओं से गुलजार रहता था कॉलेज

एक समय था जब यह कॉलेज छात्र-छात्राओं से गुलजार रहता था। यहां पांच सौ छात्र-छात्राओं का बैच चलता था। जिले के अलावा उत्तर प्रदेश से भी छात्र-छात्राएं आयूष चिकित्सा की पढ़ाई करने के लिए आते थे। आज यहां विरानगी छाई रहती है। जो क्लास रुम और प्रयोगशाला थे वह खंडहर का रुप ले लिए हैं। बिना छत के प्रयोगशाला और क्लास रुमों में टूटी कुर्सियां और टेबल पड़ा हुआ है। यहां के प्राचार्य भी अपने कॉलेज की हालत को देख चिंतित रहते हैं।

लेक्चरर और कर्मियों की कमी है कॉलेज में

राजकीय श्री धनवंतरि कॉलेज में लेक्चरर और कर्मियों की घोर कमी है। बता दें कि इस कॉलेज में लेक्चरर, मेडिकल अफसर समेत कुल एक सौ बारह पद सृजित है। जबकि, यहां कुल बत्तीस लोग ही कार्यरत हैं। एक कर्मी संविदा पर है। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि विभाग की ओर से जल्द ही रिक्त पदों पर बहाली की जाएगी। रिक्त पद को भरने के लिए कई दफे राज्य स्वास्थ्य समिति के विशेष सचिव के यहां मौखिक और लिखित आवेदन दिया गया है।

भवन निर्माण के लिए दिया था स्टीमेट

कॉलेज प्रबंधन की ओर से मिली जानकारी के अनुसार कॉलेज के पास अपना एक एकड़ अड़तीस डिसमिल जमीन है। जिस पर भवन बनाने के लिए वर्ष 2007 एवं 2011 को छह से सात करोड़ रुपये का स्टीमेट विभाग को दिया गया था। भवन बनाने के लिए सूबे के सीएम, गवर्नर और स्वास्थ्य मंत्री को आवेदन दिया गया था। बावजूद आज तक किसी भी तरह की कोई पहल नहीं हुई।

स्वास्थ्य मंत्री भी नहीं ले रहे सुध

शाहाबाद का इकलौता राजकीय श्री धनवंतरि महाविद्यालय एवं अस्पताल खुद आईसीयू में है। खास तो यह है कि यहां के सांसद केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री हैं। कॉलेज प्रबंधन की मानें तो मंत्रीजी एक बार भी कॉलेज की दुर्दशा को देखने नहीं आए। जबकि, कई दफे उनसे आग्रह किया गया है।

राजकीय श्री धनवंतरि आयुर्वेद महाविद्यालय एवं अस्पताल के प्राचार्य ने कहा कि कॉलेज की स्थिति से राज्य स्वास्थ्य समिति के विशेष सचिव से कई दफे अवगत कराया गया है। वहां से रिक्त पदों पर बहाली करने का भरोसा मिला है। भवन निर्माण एवं इंफ्रा स्ट्रक्चर को डेवलप करने के मामले में आवेदन देकर आग्रह किया गया है। जल्द ही काम शुरू कराने का आश्वासन मिला है।

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