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Dec-03-19 जानिए विक्रम को खोजने में नासा की मदद करने वाला भारतीय इंजीनियर के बारें में

Divay Bharat / बड़ी ख़बर /03-Jan-2019/Viewed : 107

सबरीमाला : महिला सम्मान की जीत

जानिए विक्रम को खोजने में नासा की मदद करने वाला भारतीय इंजीनियर के बारें में

आज हम स्वयं को 21वीं सदी का शिक्षित, समझदार व्यक्ति होने का दावा करते हैं | अपने ज्ञानानुभाव के आधार हमने कई दुसह्य कार्यों को भी फतह करने में सफलता प्राप्त की है| आधुनिकता के दौड़ में शामिल होने से हमने अपने आप को कभी पीछे नहीं रखा है. हम स्वयं को आधुनिक कहलाने में अत्यंत गर्व का अनुभव करते हैं लेकिन बात जब किसी रुढ़िवादी परंपरा को बदलने की होती है, उसमें संसोधन की होती है वहाँ हमारी आधुनिकता को जैसे लकवा मार देता है| केरल के सबरीमाला अवस्थित भगवान् अयप्पा के मंदिर में महिला प्रवेश वर्जित करना हमारे रुढ़िवादी तथा पुरुषवादी सोंच का ही नग्न प्रदर्शन है| यह सभ्य समाज के लिए दुःख का विषय होना चाहिए कि आज भी हमारा समाज नारी के प्रति दोयम दर्जे के सोंच से स्वयं को पाक साफ़ नहीं रख सका है| लेकिन आज हमें भारत की न्यायपालिका पर गर्व करना चाहिए जिसने सबरीमाला मंदिर में महिला प्रवेश वर्जित सम्बन्धी 800 साल पुरानी परम्परा को तोड़ने में अहम् भूमिका निभाई. हालाँकि इस फैसले का राज्यव्यापी विरोध भी हुआ. केरल के राजपरिवार से लेकर मंदिर के मुख्य पुजारी समेत कई हिन्दू संगठनो तक नें फैसले पर पुनर्विचार याचिका भी दायर की थी लेकिन अदालत ने सुनवाई से इंकार कर महिला सम्मान के अध्याय में एक नई कड़ी जोड़ कर इतिहास स्थापित करने का कार्य किया | इस फैसले के आने के करीब 4 माह पश्चात दो महिला बिंदु तथा कनकदुर्गा नें महिला पुलिसकर्मियों के साथ प्रातः 3:45 बजे मंदिर के गर्भ गृह में जाकर पूजा अर्चना की, इन दोनों महिलाओं ने पूर्व में भी मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश की थी लेकिन राज्य भर मे सुप्रीम कोर्ट के दिए फैसले के कड़े विरोध के कारण उन्हें सफलता नहीं मिली  बहरहाल माननीय सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दिया गया यह फैसला महिला के प्रति निकृष्ट सोंच पर करार तमाचा साबित होगा इसमें संदेह नहीं |

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